Products

कृष्णा ऑल क्लियर

Downloads

कुपोषण को समाप्त करो किटक रोग मुक्त उत्पादन पाओ |

  • लगातार रासायनिक खादों का इस्तेमाल होने के कारण मिटटी ख़राब हो जाने से फसलों आवश्यक मात्रा में भोजन नहीं मिल पाने से फसलों का कुपोषण हो रहा है, जिस प्रकार कुपोषित इंसान बार-बार बीमार पड़ता है, उसी प्रकार कुपोषित फसलों पर किटक और रोगों का अटेक ज्यादा होता है |
  • कृष्णा ऑल क्लियर में जो प्रमुख घटक है उसका नाम है "सिलिका" यह घटक सभी फसलों के लिए अत्यावश्यक है, अगर मिटटी में सभी घटकों की उपलब्धता हो, परन्तु "सिलिका" घटक की कमी हो, तब उपलब्ध घटक भी फसल को मिलने में कठिनाई आती है |
  • इसलिए कृष्णा ऑल क्लियर फसल को कुपोषण से बचाने के लिए बेहद जरुरी है |
  • कृष्णा स्प्रे प्लस १०० मिली.

ताकतवर फसल किटक तथा रोगों से बचाव करने में समर्थ होती है.

  • ऐसी मान्यता है की, पृथ्वी पर सजीवों की 84 लाख योनी हैं, उनमें से एक इंसान है, उसी प्रकार कीटकों की भी अनेक प्रजाती हैं, परन्तु इन कीटकों का भोजन वनस्पति होती है |
  • किटक कमजोर फसलों का नुकसान करते हैं, ताकतवर फसलें कीटकों तथा रोगों को प्रतिकार करती हैं.
  • कृष्णा ऑल क्लियर फसलों को ताकतवर बनाता है, उनकी प्रतिकारशक्ति बढ़ाता है, इसलिए ऐसी फसलें कीटकों तथा रोगों से स्वयं का बचाव कर लेती हैं.

कृष्णा ऑल क्लियर बाजार में उपलब्ध सभी उत्पादनों से ज्यादा ताकतवर है.

  • कृष्णा ऑल क्लियर तरल स्वरूप में है, इसमें मुख्य घटक "सिलिका" का प्रतिसत 70 है, बाजार में इस जैसे अनेक उत्पादन मिलते हैं, उनमें मुख्य घटक "सिलिका" डेढ़ प्रतिसत से 15 प्रतिसत तक है, इससे अधिक पॉवरका उत्पादन देखने को नहीं मिला.
  • आप इस छिड़काव के घोल में कोई भी रासायनिक दवाई भी मिला सकते हैं. सम्पूर्ण घोल में मिलाने के पहले थोड़े प्रमाण में मिलाकर चेक कर लें, फिर मिलाएं.
  • बाजार में मिलनेवाले जिस उत्पादन में "सिलिका" का प्रमाण ज्यादा है, वह 1 लीटर पानी में 2 मिली मिलाना पड़ता है.
  • कृष्णा ऑल क्लियर ची कीमत बाजार में मिलनेवाले सबसे ज्यादा "सिलिका" घटक के बराबर है, उसके बावजूद किसी भी फसल के छिड़काव में पहली बार 15 लीटर पानी में 5 मिली उसके बाद जब भी छिड़काव किया जाय 15 लीटर पानी में 2 मिली मिलाना पड़ता है.
  • मतलब जहाँ दूसरे उत्पादन १५ लीटर पानी में 30 मिली मिलाना पड़ते हैं, वहां कृष्णा ऑल क्लियर सिर्फ 2 मिली मिलाना पड़ता है, पैसों की बचत ही बचत.

रस चूसनेवाले किटकों से फसल का बचाव होता है.

  • किसी भी फसल का सबसे ज्यादा नुकसान रस चूसनेवाले किटक करते हैं, परिणाम यह होता है की, फसल की ग्रोथ पूरी तरह से रुक जाती है, पत्ते ख़राब हो जाने के कारण फसल सूर्यप्रकाश की मदत से भोजन बनाना बंद कर देती है, भोजन की कमी से छोटे-छोटे फल तथा फूल गिरने लगते हैं.
  • कृष्णा ऑल क्लियर पत्तों के एपिडर्मन सेल में कठिन लेयर बनाता है, जिसके कारण किटकों को पत्तों से रस चूसने में व्यवधान आता है.
  • इसके बाद भी अगर रस चूसनेवाले किटक दिखें या नुकसानी नजर आये तब कंपनी का आर्गनिक उत्पाद "नारायण अस्त्र" 15 लीटर पानी में 10 मिली मिलाकर छिड़काव करें सभी समस्याओं से तुरंत मुक्ति मिलेगी.

इल्ली के नुकसान से कुछ प्रमाण में बचाव होता है.

  • इल्ली के अंडे से जब इल्ली बाहर निकलती है, पत्तों का बहुत ज्यादा नुकसान करती है.
  • कृष्णा ऑल क्लियर के इस्तेमाल से पत्तों के एपिडर्मन सेल में कठिन लेयर तैयार होता है, छोटी इल्ली जब पत्तों को खाना प्रारम्भ करती है, कठिन लेयर के कारण उसके दांत घस जाते हैं, इसलिए भूखी रहकर मर जाती है.
  • इसके बाद भी अगर इल्ली दिखें या नुकसानी नजर आये तब कंपनी का आर्गनिक उत्पाद "नारायण अस्त्र" 15 लीटर पानी में 10 मिली मिलाकर छिड़काव करें सभी समस्याओं से तुरंत मुक्ति मिलेगी.

कृष्णा ऑल क्लियर के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी.

  • जिन फसलों पर किटक तथा रोगों का अटेक ज्यादा होता है, उन फसलों पर रासायनिक दवाओं का छिड़काव नियमित किया जाता है, रासायनिक छिड़काव से फसल कमजोर हो जाती है, इसलिए दवाओं का रिझल्ट तो मिलता नहीं, फसल और कमजोर होती जाती है.
  • जब कोई आदमी अनेक बीमारियों से ग्रस्त होता है, डॉक्टर उसे दवाइयों के साथ-साथ टॉनिक भी देते हैं, जिसके कारण वह जल्दी अच्छा हो जाता है.
  • उसी प्रकार किटक तथा रोगो के अटेकवाली फसलों पर रासायनिक दवाओं का छिड़काव करते समय, कृष्णा ऑल क्लियर मिला दिया जाय, तब रिझल्ट ज्यादा बेहतर तथा जल्दी मिलता है.
  • जिस फसल पर ऑल क्लियर का रेग्युलर छिड़काव होता है, उस फसल पर किटक तथा रोग कम से कम आते हैं, अगर आये भी तो रासायनिक दवाओं के छिड़काव से तुरंत कंट्रोल मिलता है, अगर आप आर्गनिक उपाय चाहते हों तब कंपनी के आर्गनिक उत्पादन "नारायण अस्त्र" का इस्तेमाल करें.
  • मतलब जहाँ दूसरे उत्पादन १५ लीटर पानी में 30 मिली मिलाना पड़ते हैं, वहां कृष्णा ऑल क्लियर सिर्फ 2 मिली मिलाना पड़ता है, पैसों की बचत ही बचत.

पत्तों पर आनेवाले फफूंद रोगों के लिए सर्वोत्तम है.

  • कृष्णा ऑल क्लियर किसी भी फसल के पत्तों पर आनेवाले सभी प्रकार के फफूंद रोगों के लिए ब्रम्हास्त्र है, जिन फसलों पर कृष्णा ऑल क्लियर का नियमित छिड़काव होता है, उन फसलों पर फफूंद रोग नहीं आता.
  • जैसे अंगूर की फसल में डाउनी मिल्ड्यू, पावडरी मिल्ड्यू तथा बेल वर्गीय फसलों पर आनेवाले फफूंद रोग, जहाँ कृष्णा ऑल क्लियर का नियमित छिड़काव होता है, वहां नहीं आते.
  • जब सब तरफ फफूंद रोगों का अटेक चल रहा होता है, तब भी चिंता नहीं करना पड़ती, परिस्तिथियाँ बहोत ज्यादा ख़राब हुई तब भी रासायनिक दवाई के एक छिड़काव से कंट्रोल मिल जाता है.

गन्ना (शेरडी) तथा चावल ( भात-डांगर) की फसल में जमीन से देना फायदे का है.

  • उपरोक्त दोनों फसलों को "सिलिका" घटक ज्यादा मात्रा में लगता है, "सिलिका" घटक की कमी के कारण उत्पादन में भारी कमी आती है.
  • गन्ने की फसल के लिए प्रति एकड़ 1 लीटर कृष्णा ऑल क्लियर तथा चावल की फसल के लिए प्रति एकड़ 250 ग्राम कृष्णा ऑल क्लियर पानी के साथ देना चाहिए.
  • पहले कृष्णा ऑल क्लियर जमीन से देने की मात्रा ज्यादा थी, परन्तु रिसर्च में उपरोक्त प्रमाण में अच्छे रिझल्ट मिले हैं, इसलिए प्रति एकड़ मात्रा कम की है.

प्रकाश संश्लेषण क्रिया में तेजी आती है.

  • किसी भी वनस्पति को ९६ प्रतिसत भोजन प्रकाश संश्लेषण से प्राप्त होता है, प्रकाश संश्लेषण क्रिया जितनी तेजी से होगी उतना उत्पादन बढ़कर मिलेगा.
  • कृष्णा ऑल क्लियर का छिड़काव होने से फसल को "सिलिका" घटक की उपलब्धता बढ़ जाती है, इसलिए प्रकाश संश्लेषण क्रिया तेज हो जाती है, परिणामस्वरूप फसल को प्रकृति से बिनामूल्य मिलनेवाला भोजन ज्यादा मात्रा में मिलने लगता है.

कृष्णा ऑल क्लियर इस्तेमाल करने का तरीका.

  • किसी भी फसल के लिए पहली बार होनेवाले छिड़काव में 15 लीटर पानी में 5 मिली कृष्णा ऑल क्लियर मिलाना है.
  • उसी फसल पर बाद में होनेवाले छिड़काव में 15 लीटर पानी में सिर्फ 2 मिली कृष्णा ऑल क्लियर मिलाना है.
  • जिस फसल में जमीन से देना है, उसमें पानी के साथ देना है.

किसी भी उत्पादन में मिलाया जा सकता है.

  • कृष्णा ऑल क्लियर किसी भी रासायनिक दवाई तथा खाद में मिलाया जा सकता है.
  • जिस उत्पादन के साथ दूसरा कोई भी उत्पादन नहीं मिलाया जा सकता, उसे छोड़कर दूसरे सभी उत्पादनों में मिलाया जा सकता है.