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फार्मर च्वाईस पैकेज

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प्रकृति और उसकी कार्यपद्धती को जानिये.

दूसरी सभी योनी के सजीवों की स्तिथि उत्तम है.

वनस्पति का भोजन क्या है.

वनस्पति के सम्पूर्ण भोजन की व्यवस्था प्रकृति ने बनाई है, इस बात को सारी दुनिया के वैज्ञानिक मानते हैं, उनका रिसर्च कहता है की, किसी भी वनस्पति को 96.2 प्रतिसत भोजन सूर्यप्रकाश, हवा तथा पानी से मिलता है, बचे हुए 3.8 प्रतिसत भोजन की व्यवस्था मिटटी से पूरी होती है, जिसे हम मिटटी कहते हैं, वास्तव में वो सभी प्रकार के खनिज हैं, जिनकी हमारी वनस्पति को आवश्यकता है, जैसे मुख्य अन्न द्रव्य में नत्र, स्फुरद, पोटाश, दुय्यम अन्न द्रव्य में कैल्शियम, मेग्नेशियम, सल्फर, तथा सूक्ष्म अन्न द्रव्य में बोरान, क्लोरीन, कॉपर, आयरन, मेंगनीज, मालीब्लेडनम, झिंक, वनस्पति को कम-ज्यादा प्रमाण में लगनेवाले ये सभी घटक खनिज के स्वरूप में मिटटी में हैं, आवश्यकतानुसार वनस्पति को मिलते हैं, इसके अलावा 3 घटक हैं, कार्बन,हायड्रोजन तथा आक्सीजन ये घटक पानी तथा हवा से उपलब्ध होते हैं.

वनस्पति को भोजन के उपलब्धिकरण की प्रक्रिया क्या है.

एक ग्राम मिटटी में १० करोड़ सूक्ष्म जीवाणु होते हैं, इनका भोजन वो खनिज हैं, जिसे हम मिटटी कहते हैं, ये खनिज जीवाणुओं का भोजन हैं, उनके खाने से खनिज का रूप परिवर्तन होता है, फिर उसे दूसरे जीवाणु कहते हैं, इस प्रकार मिटटी के खनिज जीवाणुओं के भोजन से वनस्पति का भोजन बन जाते हैं, ये वनस्पति को भोजन देने की प्राकृतिक व्यवस्था थी, वनस्पति को आवश्यकता से अधिक भोजन मिलता था, इसलिए वनस्पति बलवान तथा निरोगी रहती थी, बलवान वनस्पति किटकों को प्रतिकार करती थी, इसलिए जहरीली दवाओं का छिड़काव भी नहीं करना पड़ता था.

आज हमारी वनस्पति को प्रकृति से बिनामूल्य भोजन क्यों नहीं मिलता.

प्रकृति से छेड़छाड़ के भयानक परिणाम भोगना पड़ते हैं, जिस प्रकार जंगल नष्ट करने से बरसात कम हो गई, गर्मी में वृद्धि होने से हिमालय पिघल रहा है, उसी प्रकार मिटटी में जहाँ करोड़ों-करोड़ जीवाणु थे, उसमें गर्मी बढ़ानेवाले रासायनिक खाद डालने से बड़ी संख्या में जीवाणु मर गए, परिणाम यह हुआ की वनस्पति को मिटटी से बिनामूल्य भोजन मिलना बंद या बहोत कम हो गया, इसलिए वनस्पति को बाहर से रासायनिक खाद के माध्यम से भोजन देना जरुरी हो गया, अब किसान भाई रासायनिक खाद डालता तो है, परन्तु वनस्पति को आवश्यकतानुरूप नहीं मिलने के कारण उत्पादन में कमी और किटकों का अटेक बढ़ गया है, इन समस्याओं का सामना करते-करते थक चुका किसान भाई आत्महत्या करने को मजबूर हो रहा है.

मल्टीप्लायर मिटटी में निर्माण हुई खराबी को दूर करने में सक्षम है.

झिरो बजेट नैसर्गिक फार्मिंग ही एकमेव पर्याय है, किसान भाई को सुखी तथा संपन्न बनाने का, उसके लिए मिटटी में निर्माण हुई खराबी दूर होना जरुरी है, मल्टीप्लायर से आप बढे हुए उत्पादन के साथ मिटटी को सोने जैसी बना सकते हैं, उसके बाद मल्टीप्लायर का भी, इस्तेमाल करने की आवश्यकता नहीं, मल्टीप्लायर १३ वर्षों के निरंतर संशोधन का परिणाम है, मल्टीप्लायर मिटटी में निर्माण हुई खराबी को दूर करके, मिटटी को उपजाऊ बनाता है, फसल को बलवान बनाकर किटक रोग मुक्त बनाता है, तुरंत.... पहली फसल से ही उत्पादन बढ़ाकर देता है.

क्या मल्टीप्लायर का इस्तेमाल जरुरी है....

नहीं...... आप मल्टीप्लायर का इस्तेमाल नहीं करते हुए भी, झिरो बजेट नैसर्गिक फार्मिंग कर सकते हैं, परन्तु इसमें पहली फसल में आपका उत्पादन 70 प्रतिसत के लगभग कम हो जाएगा, फिर धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ेगा, रासायनिक डालकर जितना मिलता था, उतना मिलने के लिए 10 से 12 साल का समय लगेगा, मतलब मल्टीप्लायर के बगैर अगर खेती को रसायन मुक्त बनाने का प्रयत्न किया, तब उत्पादन में लम्बे समय तक के लिए भारी कमी आ जाती है.

क्या-क्या है फार्मर च्वाईस पैकेज में.

फार्मर च्वाईस पैकेज में मल्टीप्लायर के 250 ग्राम के 4 पाउच हैं, तथा, कृष्णा ऑल क्लियर और कृष्णा स्प्रे प्लस की 100 मिली की प्रत्येकी एक बॉटल.

मल्टीप्लायर फसल को कैसे देना है.

किसी भी फसल में मल्टीप्लायर के ३ पाउच 10 - 10 दिन के अंतर से जमीन से देना है, टपक पद्धत (ड्रिप इरीगेशन) व्यवस्था होने पर टपक पद्धत से देना है, बरसात के मौसम में जब पानी नहीं देना हो, तब मिटटी या गोबर खाद में मिलाकर पुरे खेत में यूरिया के जैसा फेंक सकते हैं, रासायनिक खाद को मल्टीप्लायर का कोटिंग करके दिया जा सकता है, यूरिया छोड़कर किसी भी दानेदार खाद को मल्टीप्लायर की पेस्ट बनाकर कोटिंग किया जा सकता है, यूरिया खाद को कोटिंग करने के लिए मल्टीप्लायर की पेस्ट नहीं बनाना है, यूरिया खाद पर सूखा मल्टीप्लायर पावडर कोटिंग किया जा सकता है.

छिड़काव से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी.

मल्टीप्लायर का कलर काला होने के कारण इसका छिड़काव सावधानीपूर्वक करना है, फसल का कोई भी उत्पादन जिस पर दाग धब्बे नहीं चाहिए, उस फसल पर उत्पादन दिखने के बाद छिड़काव नहीं करना है.

छिड़काव के घोल में क्या-क्या मिलाना है.

पैकेज में मल्टीप्लायर के चार पाउच थे, तीन पाउच जमीन से देने के बाद एक पाउच बचा है, उसका इस्तेमाल छिड़काव में करना है, इसके अलावा कृष्णा ऑल क्लियर और कृष्णा स्प्रे प्लस की भी 100 मिली की एक-एक बॉटल आपके पास है, इन सबका इस्तेमाल छिड़काव में करना है. छिड़काव का घोल तैयार करते समय 16 लीटर का पंप आधा पानी से भर लें, बाल्टी में या किसी भी बर्तन या डब्बे में, थोड़ा पानी लें, उसमें 15 ग्राम मल्टीप्लायर ( अगर डालना हो) + कृष्णा ऑल क्लियर पहली बार 5 मिली उसके बाद कभी भी 2 मिली + कृष्णा स्प्रे प्लस 1 मिली, डालकर अच्छे से मिलाना है, इस घोल को पंप में डालकर, आवश्यकतानुसार पानी भर लें, फिर अच्छे से पुरे घोल को मिला लें, उसके बाद फसल पर छिड़काव करें.

छिड़काव कैसे करना है.

रासायनिक दवाओं का छिड़काव भागते-भागते किया जाता है, यहाँ पर आपको आराम से छिड़काव करना है, पत्तों पर छिड़काव किये हुए घोल की बारीक-बारीक बुँदे दिखना चाहिए ऐसा छिड़काव करें.

अधिक जानकारी के लिए.....

अगर आप मल्टीप्लायर, कृष्णा ऑल क्लियर या कृष्णा स्प्रे प्लस के विषय में अधिक जानकारी चाहते हैं, तब आप कंपनी प्रतिनिधि से सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, उत्पादन के बारे में, तरह-तरह की फसलों के बारे में, सम्पूर्ण जानकारी लिखित स्वरूप में तथा पीपीटी फार्मेट में कंपनी प्रतिनिधि के पास उपलब्ध है, आप व्हाट्सप्प पर प्राप्त कर सकते हैं.

फार्मर च्वाईस पैकेज के इस्तेमाल के बाद.

किसी भी फसल में उत्पादन बढ़कर मिलने के लक्षण......... फसल के पत्तों की लम्बाई तथा चौड़ाई बढ़ना, पत्तों की संख्या बढ़ना, पत्तों का कलर डार्क ग्रीन बनना, फसल की ग्रोथ में तेजी आना इत्यादि लक्षण दिखने पर किसान भाई छाती पर हाथ रखकर कहता है की, उत्पादन बढ़कर मिलेगा, ये सब लक्षण आपको फार्मर पैकेज के इस्तेमाल के बाद अंदाजे १ महीने के अंदर स्पष्ट दिखने लगेंगे.

उत्पादन बढ़कर मिलने के बाद ही दूसरी फसलों में इस्तेमाल करें.

फार्मर च्वाईस पैकेज प्रत्येक फसल में इस्तेमाल करने की आवश्यकता नहीं है, एक एकड़ खेत में इस्तेमाल करके रिझल्ट देख लो, अगर आपको हमेशा के मुकाबले उत्पादन बढ़कर मिलता है, तब सभी खेतों में सभी फसलों में इस्तेमाल करिये, इस पैकेज के सभी उत्पादन अलग से मिलते हैं, आपको जिस उत्पादन की जितनी मात्रा में आवश्यकता है, उतना खरेदी किया जा सकता है.