जैविक खेती




खेती के क्षेत्र में खेती को आसान बनानेवाला कोई अनुसंधान क्यों नहीं हुआ, क्योंकि, खेती व्यवस्था का सम्पूर्ण संचालन प्रकृति के द्वारा होता है, जंगल में कोई रासायनिक खाद डालने नहीं जाता, फिर भी जंगल आबाद हैं, सारी दुनिया के वैज्ञानिकों का अनुसंधान कहता है की, किसी भी फसल को जितने भोजन की आवश्यकता है उसका ९६.२ प्रतिसत भोजन सूर्यप्रकाश, हवा और पानी से मिलता है|

इन सब वास्तविकताओं के बावजूद आज तक किसी कंपनी ने या सरकार के किसी वैज्ञानिक ने इस दिशा में कोई अनुसंधान नहीं किया की, प्रकृति के द्वारा बिनामूल्य मिलनेवाला भोजन फिर से बिनामूल्य प्राप्त होने लगे|

मिटटी में निर्माण हुई समस्या के विषय में अगर आप अधिक जानना चाहते हैं, तब आप इस वेब साइट पर दी गई जानकारी "हमारा अनुसंधान" जरूर पढ़िए, इसमें विस्तार से बताया गया है की ,मिटटी में खराबी कैसे और क्यों हुई है और इसे दुरुस्त कैसे किया जा सकता है|

रासायनिक खादों के इस्तेमाल से ख़राब हो चुकी मिटटी अगर सुधार दी जाए, तब फिर से प्रकृति की बिनामूल्य पोषण व्यवस्था सुरु हो जाएगी, परन्तु अगर ऐसा हो गया तो, वो कम्पनियाँ जो अनेक प्रकार के उत्पाद आपके खेतों में डलवा रही हैं, उनकी बिक्री बंद हो जायेगी, बस यही कारण है, खेती व्यवस्था में अनुसंधान ना होने का|

आपकी कंपनी कृष्णा एग्रीबिजनेस डेवलपमेंट प्रायवेट लिमिटेड की मदर कंपनी ने १३ वर्ष लगातार अनुसन्धान करके आपके लिए ऐसे उत्पादों की निर्मिति की है, जिनके इस्तेमाल से तुरंत उत्पादन में वृद्धि होती है, किड रोग का अटेक कम से कम होता है, कम होते-होते समाप्त हो जाता है, उत्पादन बढ़ते-बढ़ते अगले सात सालों में ३ गुना हो जाता है, उसके बाद आपको हमारी कंपनी के उत्पाद भी डालने की आवश्यकता नहीं रहती.

खेती का व्यवसाय दुनिया का सबसे ज्यादा फायदा देनेवाला व्यवसाय है, जब आपके खेतों की मिटटी का सम्बन्ध प्रकृति के साथ जुड़ जायेगा, बड़े-बड़े उद्योगपति खेती के क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, जमीन की कीमत सोने के जैसी हो जायेगी, दुनिया में कोई भी बिजनेस १०० प्रतिसत से ज्यादा प्रॉफिट देनेवाला नहीं है, सिर्फ खेती एक ऐसा व्यवसाय है, जिसमें लगत मूल्य का १०० गुना तक फायदा मिल सकता है, एक दाना खेत में डालने पर १०० या उससे ज्यादा दाने मिलते हैं, मतलब १०० गुना फायदा.