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मल्टीप्लायर

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प्रकृति और वनस्पति

वनस्पति को भोजन प्रदान करने की व्यवस्था प्रकृति के द्वारा संचालित है, अगर ऐसा ना होता, तो जंगल में भी वनस्पति को जिन्दा रखने के लिए खाद देना पड़ता, परन्तु यह भी एक विदारक सत्य है की, हमारे खेतों में खाद नहीं डाला तो अच्छा उत्पादन नहीं मिलता, ऐसा क्यों होता है, इसे विस्तार से जानने के लिए आप "जानिए फसलों को भोजन कैसे मिलता है" पढ़िए.

प्रणाली में व्यवधान

जंगल में आज भी खाद डालना जरुरी नहीं है, क्योंकि, जंगल में आज भी प्रकृति के द्वारा बिनामूल्य भोजन प्रदान करनेवाली प्रणाली कार्यरत है, हमारे खेतों में जब से हमने रासायनिक खाद डालना प्रारम्भ किया, धीरे-धीरे प्रकृति की बिनामूल्य भोजन प्रदान करनेवाली प्रणाली में व्यवधान आ गया, इसलिए खेतों में खाद नहीं डाला तो कुछ भी अच्छा पैदा नहीं होता.

आवश्यकता थी खराबी को दूर करनेवाले अनुसन्धान

किसान भाई को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए आवश्यकता थी, ऐसे अनुसंधान की, जिसके इस्तेमाल से मिटटी में रासायनिक खादों के इस्तेमाल से निर्माण खराबी दूर होकर फसलों को प्रकृति के द्वारा बिनामूल्य भोजन मिलने लगे, परन्तु इस दिशा में किसी भी कंपनी ने कोई अनुसंधान नहीं किया, क्योंकि, यह अनुसंधान सिर्फ तब तक बिकता जब तक मिटटी में सुधार नहीं आ जाता, जिस किसान भाई के खेत की मिटटी सुधर जाती उसे इस उत्पाद के इस्तेमाल की आवश्यकता नहीं रहती.

पैसों के लालच ने किसान भाई को आत्महत्या के लिए मजबूर किया.

बस यही एक कारण था इस दिशा में अनुसन्धान ना होने का, कम्पनियाँ चाहती हैं, उनका उत्पाद किसान भाई जिंदगी भर इस्तेमाल करता रहे और उनको करोड़ों-करोड़ रुपये मिलते रहें, इसलिए कंपनियों ने फसलों के लिए रासायनिक भोजन बनाया, जो आपकी फसलों को बिनामूल्य मिलता था, उसे पैसे देकर खरीदना पड़ा, इन रासायनिक भोजन के कारण फसलों पर किड और रोगों का अटेक बढ़ने लगा, फिर कंपनियों ने रासायनिक दवाइयां बनाई, इस तरह खेती व्यवस्था से निर्माण होनेवाला पैसा बड़ी-बड़ी कंपनियों में जमा होने लगा, खेती का लागत मूल्य बढ़ने से किसान भाई दिन-प्रतिदिन कंगाल होने लगा, अब स्तिथि इतनी भयानक हो गई है की, किसान भाई आत्महत्या करने को मजबूर है.

अब प्रकृति आपकी शत्रु नहीं मित्र बनेगी.

    आपकी कंपनी ने १३ वर्षों के अथक अनुसंधान के बाद ऐसा उत्पादन बनाने में सफलता पाई है, जिसका नाम है "मल्टीप्लायर" जिसके इस्तेमाल से,
  • फसल का उत्पादन कम से कम ५० प्रतिसत तक तुरंत बढ़ जाता है.
  • मिटटी सुधरने तक हर साल उत्पादन पिछले उत्पादन से बढ़कर मिलता है.
  • जैसे-जैसे उत्पादन बढ़कर मिलता है, रासायनिक खाद कम किये जाते हैं.
  • ५ से ७ साल में रासायनिक खाद शून्य हो जाते हैं, मिटटी पूरी तरह से सुधर जाती है.
  • मिटटी सुधरते ही आपकी फसलों को प्रकृति के द्वारा बिनामूल्य भोजन मिलने लगता है.
  • आपको "मल्टीप्लायर" भी डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती. इसके बाद आपकी खेती झिरो बजट की खेती बन जाती है.
  • आपको खेती में बाहर से एक रुपये का भी उत्पादन खरीदी नहीं करना पड़ता.
  • आपको "मल्टीप्लायर" भी डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती.

किड औररोगों से भी छुटकारा मिलेगा.

किड रोग की समस्या का मूल है, फसलों का कुपोषण, "मल्टीप्लायर" फसलों को उसकी आवश्यकता से ज्यादा भोजन की उपलब्धता कराता है, फसल बलवान बनती है, इसलिए किड और रोग अपने आप समाप्त हो जाते हैं, रासायनिक दवाओं के छिड़काव धीरे-धीरे करके बंद हो जाते हैं, इस विषय में अधिक जानने के लिए पढ़ें "फसलों को भोजन कैसे मिलता है".