हमारा अनुसंधान

१३ सालों के अविरत अनुसन्धान की कहानी |

किसान भाइयों को कृषी में आनेवाली समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सक्षम मल्टीप्लायर  खाद की ताकत कार्य एवं उपयोगिता .

मिट्टी की ताकत 

किसान भाइयों , हम जिस मिट्टी में खेती कर रहे हैं, ये बहुत ही खास है ,प्रकृति ने इस मिट्टी को इतना अदभुत बनाया है कि इसके अंदर जब बीज जाता है तो वह अंकुरता है ,उसमें २ पत्ते उगते हैं और धीरे -धीरे वो बढ़ता है | विशाल वृक्ष बनता है | उसमें फल और फूल लगते हैं  | इस सारी प्रक्रिया की  ताकत  प्रकृति ने इस मिट्टी में दी है |

 

प्रकृति की कार्यप्रणाली

हमें आज लगने लगा है कि रासायनिक खाद डाले बिना खेती नहीं हो सकती परंतु प्रकृति की  व्यवस्था बिलकुल इस तरह की बनाई गई है कि इसके अंदर यह प्रक्रिया अपने आप होती है | हम जानते हैं यदि गर्मी ज्यादा हो तो बरसात अच्छी होगी, अगर बरसात ज़्यादा आएगी तो ठंड ज्यादा होगी | कहीं  अगर वृक्ष ज्यादा हैं, तो उन प्रदेशों में बरसात ज़्यादा होती है, या जिस भाग में ज़्यादा वृक्ष हैं, उस भाग में ज़्यादा वर्षा होती है | यह कुदरत की प्रणाली भी एक दूसरे पर आधारित है | एक चक्र के रूप में इसका कार्य चलता है, तात्पर्य यह कि हमारी मिट्टी में सभी प्रकार के पौधों को बड़ा करने की,फल-फूल देने  की व्यवस्था प्रकृति ने बनाई है और इस प्रणाली को अगर हम समझते हैं तो हमें खेती करना काफी आसान हो जायेगा |    

बगैर रासायनिक खाद के जंगल में वनसंपदा का विकास

किसान भाइयों,आप किसी जंगल में जाइए वहाँ हमें बड़े-बड़े विशाल वृक्ष देखने को मिलते हैं , छोटे-छोटे पौधे देखने को मिलते हैं , फल के पेड़ों में जो फल लगे हुए हैं, उन पर कोई व्यक्ति किसी रासायनिक दवाईयों का छिड़काव करने नहीं गया था परंतु उस फल के पेड़ में लगे बड़े-बड़े  फल हमें  कीड़ और रोग से मुक्त नज़र आते हैं | ऐसे फलों को हम तोड़कर खा सकते हैं, और वहाँ के स्थानिक लोग उन फलों को तोड़कर बाजार में बेचने भी आते हैं | किसान भाइयों , क्या उस जंगल में कोई 'एन पी के ' डालने गया था ? ना आप गए थे ना सरकार ,यह मुमकिन भी नहीं  है | जब बिना 'एन पी के ' के वहाँ फसल उगती है तो हमारी खेती में 'एन पी के ' डालना क्यों आवश्यक है ? इस बात को आप अच्छे से समझ लेते हैं तो खेती करना हमारे लिए काफी आसान हो जायेगा |

मिट्टी की सजीवता

किसान भाइयों , हमारी मिट्टी सजीव है इस दुनिया के अंदर जो भी कुछ है, वह एक दूसरे पर आधारित है | हम कहते हैं,  "जीव जीवात जायते, जीवे जीवष्य जीवनम्" अर्थात एक जीवन पर दूसरा जीवन आधारित है  | हमारी इस मिट्टी के सजीव होने को पूर्वजों ने अच्छी तरह पहचाना था,  हमारे पूर्वज इसे धरती माँ कहते थे , हम भी धरती माँ कहते हैं | हमने जितने भी नाते जोड़ें हैं, वो निर्जीव के साथ नहीं हैं , सभी सजीव के साथ हैं | एक तालाब में पानी भरा है पर उसमें हलचल नहीं है तो उससे हम नाता नहीं जोड़ते, परंतु नदी जिसमें पानी बहता है उसे हम गंगा माँ , माँ  नर्मदे कहते हैं , हमने उसके साथ एक नाता जोड़ा है | उसी तरह से हमारे पूर्वजों ने मिट्टी की ताकत को पहचाना था , इस मिट्टी की  सिस्टम और सजीवता को पहचाना था और माँ कहा था तो किसान भाइयों ये मिट्टी सजीव है, और सजीव के साथ हमने जो व्यवहार किया है, उसकी वजह से ही हमें आज कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है |