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कृष्णा स्प्रे प्लस

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कृष्णा स्प्रे प्लस इस्तेमाल करना क्यों जरुरी है.

  • कृष्णा स्प्रे प्लस आधुनिक खेती, फलबाग खेती, विशेषकर ऐसी खेती जिसमें किटक तथा रोगों का अटेक ज्यादा होता है, बार-बार रासायनिक दवाओं का छिड़काव करना पड़ता है या पानी में घुलनशील रासायनिक खादों का छिड़काव किया जाता है, ऐसे सभी छिड़काव में कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाना बेहद जरुरी है.
  • किसी भी फसल में 80 प्रतिसत से ज्यादा किटक पत्तों के पीछे छुपकर फसल की नुकसानी करते हैं, रासायनिक दवाओं के सभी छिड़काव पत्तों के ऊपर के भाग पर किये जाते हैं, इसलिए सिर्फ कुछ किटक पर ही रासायनिक दवा का सीधा असर होता है.
  • किसान भाई महँगी से महँगी दवाओं का छिड़काव करता है, परन्तु किटक पत्तों के पीछे छिपे होने के कारण उन पर दवाई का असर नहीं होता, इसलिए बार-बार दवाओं का छिड़काव करना पड़ता है.
  • रासायनिक दवाओं का बार-बार छिड़काव करना पड़ा, तब महँगी से महँगी दवा का छिड़काव भी बेअसर सिद्ध होता है, ज्यादा पॉवर की दवाएं भी काम नहीं करती.
  • बार-बार रासायनिक दवाओं का छिड़काव तथा ज्यादा मेन पॉवर के इस्तेमाल से पैसों की बर्बादी होती है, जिसके कारण खेती का लागत मूल्य बढ़ जाता है, प्रति एकड़ उत्पादन मेन कमी आती है, ऐसे मेन उत्पादन को बाजार मेन भाव नहीं मिला तो खेती नुकसान घाटे का सौदा बन जाती है.

कृष्णा स्प्रे प्लस की खासियत.

  • कृष्णा स्प्रे प्लस की निर्मिति "सिलिका" घटक से की गई है, दुनिया में सिर्फ 3 कंपनी "सिलिका" बनाती हैं, उनमें से एक भी भारत में नहीं है, "सिलिका" घटक से पूरी दुनिया में अलग-अलग प्रकार के उपयोग के 800 से ज्यादा प्रकार के उत्पादन बनाये जाते हैं, आपकी कंपनी ने खेत में होनेवाले छिड़काव को कार्यक्षम बनाने के लिए "सिलिका" घटक से कृष्णा स्प्रे प्लस की निर्मिति की है.
  • किटक कमजोर फसलों का नुकसान करते हैं, ताकतवर फसलें कीटकों तथा रोगों को प्रतिकार करती हैं.
  • आपकी कंपनी ने कृष्णा स्प्रे प्लस को बहोत ज्यादा कॉन्सेंट्रेट बनाया है, इसलिए बहोत कम मात्रा में लगने के कारण पैसों की बचत जोरदार रिझल्ट मिलता है, इसलिए बार-बार छिड़काव से मुक्ति मिलती है.
  • 200 लीटर का घोल बनाने के लिए सिर्फ 10 मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाना पड़ता है, 100 मिली कृष्णा स्प्रे प्लस की एक बॉटल से 2000 छिड़काव का घोल बनाया जा सकता है, इतना कम लगनेवाला दूसरा कोई उत्पादन देखने में नहीं है, कृष्णा स्प्रे प्लस बहोत ज्यादा कॉन्सेंट्रेट होने के कारण कम मात्रा में लगता है, मतलब पैसों की बचत ही बचत.
  • कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाया हुआ घोल जब फसलों पर छिड़काव किया जाता है, वह घोल पत्तों के अंदर समा जाता है, जैसे ही पत्तों के पीछे छुपे हुवे किटक पत्तों से रस चूसने का प्रयत्न करते हैं, छिड़काव में मिलाया गया रासायनिक घटक उनके पेट में जाने से तुरंत मर जाते हैं.
  • मतलब छिड़काव होते ही किटक मरने लगते हैं, इसलिए बार-बार छिड़काव नहीं करना पड़ता.
  • जिस प्रकार नमक की कीमत नाममात्र होती है, परन्तु भोजन में नमक ना डाला हो तब भोजन किसी काम का नहीं, चाहे उसे स्वादिष्ट बनाने के लिए कितना कुछ डाला हो, बिलकुल उसी प्रकार छिड़काव के घोल में कृष्णा स्प्रे प्लस ना मिलाया हो, तब छिड़काव व्यर्थ सिद्ध होता है.

कृष्णा स्प्रे प्लस इस्तेमाल का तरीका.

  • कृष्णा स्प्रे प्लस बहोत ही कम मात्रा में लगता है, इसलिए इसे इंजेक्शन से निकालना ज्यादा उपयुक्त है, डॉक्टर जिस इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं वह 10 रुपये में मिलता है, इंजेक्शन की मदत से 1 मिली से 10 मिली तक आसानी से निकाला जा सकता है.
  • ज्यादातर पंप १६ लीटर क्षमता के होते हैं, उसमें १५ लीटर तक छिड़काव का घोल भरा जाता है, उसमें कृष्णा स्प्रे प्लस सिर्फ 1 मिली मिलाना है.
  • आप कृष्णा स्प्रे प्लस का कॉन्सेंट्रेट घोल बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं, उसके लिए कोई मग या ग्लास से 12 बार पानी भरकर किसी छोटे ड्रम या डब्बे में डालें, उसके बाद उसमें 10 मिली कृष्णा स्प्रे प्लस मिलाएं, अब आप इस तैयार कॉन्सेंट्रेट घोल में से 1 माप घोल निकालकर पंप में डालकर छिड़काव कर सकते हैं, इस सिस्टम से 10 मिली कृष्णा स्प्रे प्लस से १२ पंप बनते हैं, और अगर आप सीधे पंप में कृष्णा स्प्रे प्लस डालेंगे तब 10 पंप बनेंगे, मतलब इस सिस्टम से २ पंप ज्यादा बनते हैं.
  • कृष्णा स्प्रे प्लस से बनाया गया कॉन्सेंट्रेट घोल 8 दिन तक इस्तेमाल के योग्य होता है, यह घोल कितने दिन तक काम करेगा, यह आपके पानी की क्वालिटी पर निर्भर करता है, अगर पानी की क्वालिटी उत्तम हो जैसे फ़िल्टर वाटर का पानी हो तब बनाया गया घोल एक महीने तक इस्तेमाल के योग्य रहता है, या R O वॉटर हो तब बनाया गया घोल एक साल तक इस्तेमाल के योग्य रहता है और अगर आपने खेत के कुंवे का पानी जिसका इस्तेमाल किया जा रहा हो, इस्तेमाल किया हो, तब बनाया गया घोल 8 दिन में इस्तेमाल करना चाहिए.